आधुनिक भारत के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक - जगदीश चंद्र बोस (1858-1937)

 आधुनिक भारत के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक - जगदीश चंद्र बोस (1858-1937)



जगदीश चंद्र बोस (1858-1937)


जे.सी. बोस के नाम से प्रसिद्ध जगदीश चंद्र बोस का स्थान आधुनिक भारतीय विज्ञान के इतिहास में अद्वितीय है। उन्हें भारत का प्रथम आधुनिक वैज्ञानिक माना जाता है। जगदीश चंद्र बोस ने उस समय देश को अपनी महान खोजों और अध्ययन से गर्व करने का
अवसर प्रदान किया जब देश में शोध कार्य लगभग नहीं के बराबर था। आचार्य जगदीश चंद्र बोस ने भौतिकी और जीव विज्ञान में महत्त्वपूर्ण कार्य किये। जनवरी 1898 में यह सिद्ध हुआ कि मार्कोनी का बेतार अभिग्राही यानी वायरलेस रिसिवर (Wireless Receiver) जगदीश चंद्र बोस द्वारा आविष्कृत था। 

मार्कोनी ने इसी का एक संशोधित यंत्र उपयोग किया था जो मर्करी ऑटो कोहेरर था, जिससे पहली बार अटलांटिक महासागर पार बेतार संकेत 1901 में प्राप्त हो सका था। उस समय इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स
ने जगदीश चंद्र बोस को अपने वायरलेस हॉल ऑफ फेम' (Wireless Hall of Fame) में सम्मिलित किया। आचार्य जगदीश चंद्र बोस को मार्कोनी के साथ बेतार संचार के पथ-प्रदर्शक कार्य के लिये रेडियो का सह-आविष्कारक माना गया। बोस ने ही सूर्य से आने वाली विद्युत चुंबकीय विकिरण के अस्तित्व का सुझाव दिया था, जिसकी पुष्टि 1944 हुई। 

उन्होंने पौधों के विकास को मापने के लिये 'क्रेस्कोग्राफ' नामकएक यंत्र का विकास किया, जो 1/1,00,000 इंच प्रति सेकंड तक छोटी वृद्धि को भी दर्ज कर सकता था। उन्होंने क्रेस्कोग्राफ से प्राप्त रेखाचित्रों से सिद्ध किया कि पौधों में भी संचार व्यवस्था होती है और वैज्ञानिक तौर पर पौधों और प्राणियों की कोशिकाओं में समानता सिद्ध की। जे.सी. बोस द्वारा रिकॉर्ड किये गए पौधों में वृद्धि की अभिरचना' आज आधुनिक विज्ञान के तरीकों से भी सिद्ध हो गई है। 

पौधों की वृद्धि और अन्य जैविक क्रियाओं पर समय के प्रभाव का अध्ययन जिसकी बुनियाद जे.सी. बोस ने डाली थी, आज 'क्रोनोबायोलॉजी' कही जाती है। क्रोनोबायोलॉजी का विज्ञान जीवों पर विभिन्न प्रकार की जैविक प्रक्रियाओं के लयात्मक सामंजस्य का ऐसा अध्ययन करता है जो जीव विज्ञान को अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य और कृषि से भी जोड़ता है। ऐसी उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज और अध्ययन के लिये जे.सी. बोस को 1920 में रॉयल सोसायटी का सदस्य चुना गया। जे.सी. बोस द्वारा स्थापित 'बोस इंस्टीट्यूट' (बोस विज्ञान मंदिर) विज्ञान में शोधकार्य के लिये राष्ट्र का एक प्रसिद्ध केंद्र है।


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