भारत में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology in India)

 भारत में जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology in India)



जैव प्रौद्योगिकी जीव विज्ञान की आधुनिक शाखा है। वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जैवविविधता और अन्य कई क्षेत्रों में बेहतर उत्पाद की व्यवस्था और नई तथा विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिये 'जीन बैंक' और 'सेललाइन कल्चर' जैसे उपायों से कई नई खोजों को बढ़ावा देने के कार्य में अग्रसर है।
जैव प्रौद्योगिकी में विकास की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये कैबिनेट की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार द्वारा वर्ष 1982 में राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड (NBTB) की स्थापना एक अंतर्मंत्रालयी समन्वय एजेंसी के रूप में की गई। यह कदम भारत सरकार की छठी पंचवर्षीय योजना का भाग था। वर्ष 1986 में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी बोर्ड का उन्नयन (Upgradation) कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन पूर्ण जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology-DBT) का गठन किया गया।

नोट: वर्ष 1986-87 में जैव प्रौद्योगिकी सूचना नेटवर्क (BTIS Net) बनाया गया। यह जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics) के अनुप्रयोग के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को समर्थन देता है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT)

दूरदर्शिता और कार्यनीति (Vision and Strategy)
जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में नई सफलताएँ अर्जित करना,
संपदा के सृजन तथा विशेषकर गरीबों के कल्याण हेतु सामाजिक न्याय
को सुनिश्चित करने में जैव प्रौद्योगिकी को भविष्य के एक प्रमुख साधन
में रूप में ढालना।

लक्ष्य (Mission)

• जैव प्रौद्योगिकी की संभावनाओं का संवर्द्धन।
• उत्पादों के निर्माण में प्रौद्योगिकियों के विकास के लिये निवेश का सुनिश्चित प्रयत्न करना।
• कृषि, पोषण, सुरक्षा और आणविक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उत्पादन दक्षता और लागत में किफायती प्रौद्योगिकी, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और जिससे मानव जगत में प्रौद्योगिकी जागरूकता को बढ़ाया जा सके।
• अनुसंधान के व्यवसायीकरण की मजबूत बुनियादी संरचना को खड़ा किया जा सके जिससे बाजार में नए जैव उत्पादों को लाया जा सके।
• सामाजिक-आर्थिक विकास/जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों से महिलाओं, ग्रामीणों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का उत्थान।
• जैव प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ावा।

प्रतिबद्धता (Commitment)

• जनता के साथ व्यवहार में शिष्टता, नम्रता एवं तत्परता बनाए रखना।
• प्रकट सूचना की गोपनीयता को बनाए रखने की प्रतिज्ञा करना। निर्णय प्रक्रिया में विलंब को कम करने के लिये सरकार की आवश्यकतानुसार प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास करना।
• आम जनता को शीघ्र लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से वैज्ञानिकों, उद्योग एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ विचार-विमर्श कर नीतियों एवं प्रक्रियाओं में त्वरित बदलाव लाकर उन्नत सेवा प्रदान करना।
• जितनी जल्दी हो सके कंप्यूटरीकृत प्रचालन शुरू करने के लिये सूचना प्रणाली को अपग्रेड करना।
• पत्रिकाओं और संगोष्ठियों इत्यादि में प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रमुख नीतियों एवं प्रक्रियाओं में हुए बदलावों को जनता तक तुरंत पहुँचाना।
• वैज्ञानिकों एवं उद्यमियों द्वारा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देनाः शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच एक मज़बूत संबंध स्थापित करना; उद्यमिता के लिये मार्गदर्शक भारतीय प्रयोगशालाओं से उत्पन्न खोज की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
• आम आदमी के लिये पर्यावरण अनुकूल और उपभोक्ताओं द्वारा स्वीकार्य, सरल और किफायती जैव प्रौद्योगिकीय उत्पादों एवं सेवाओं का सृजन करना।
• देश के सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के परिणामों को प्रयोग में लाना।

स्वायत्त संस्थान (Autonomous Institutions)

विभाग ने जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मूलभूत,
अनुप्रयुक्त और ट्रांसलेशनल रिसर्च के लिये कई स्वायत्त संस्थान स्थापित
किये हैं, जो निम्नलिखित हैं-
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (NII), नई दिल्ली
• नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (NCCS), पुणे
• सेंटर फॉर डी.एन.ए, फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नॉस्टिक्स (CDFD), हैदराबाद
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च (NIPGR), नई दिल्ली
• नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (NBRC), मानेसर
• इंस्टीट्यूट ऑफ बायोरिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IBSD), इंफाल
• इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेस (ILS), भुवनेश्वर
• राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (RGCB), तिरुवनंतपुरम
• रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (RCB), फरीदाबाद
• ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI), फरीदाबाद
• इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव मेडिसिन
। (inStem), बंगलूरू
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), कल्याणी
• नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (NABI), मोहाली
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी (NIAB), हैदराबाद
• सेंटर ऑफ इनोवेटिव एंड अप्लायड बायोप्रोसेसिंग (CIAB), मोहाली

नोट: भारतीय उपमहाद्वीप की समस्याओं के संदर्भ में मानवीय रोगों और कृषि में मूल अनुसंधान पर ध्यान देने के लिये संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संघ (UNIDO) द्वारा नई दिल्ली में  सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (ICGEB) की इंटरनेशनल स्थापना की गई है। ध्यातव्य है कि इसकी शाखाएँ ट्रिएस्टे (इटली) और केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) में भी है।

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