NCERT Class 9 Hindi Chapter 2 दुःख का अधिकार
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 2 दुःख का अधिकार
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
मौखिक
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1.
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?
उत्तर:
किसी व्यक्ति की पोशाक देखकर हमें यह पता चल जाता है कि उस व्यक्ति की हैसियत क्या है तथा वह व्यक्ति किस श्रेणी का है।
प्रश्न 2.
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था? [CBSE]
उत्तर:
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे इसलिए नहीं खरीद रहा था क्योंकि वह फुटपाथ पर बैठी हुई फफक-फफककर रो रही थी।
प्रश्न 3.
उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?
उत्तर:
उस स्त्री को देखकर लेखक का मन इतना व्यथित हो गया कि वह उसके पास जाकर रोने का कारण पूछना चाहता था, पर उसकी पोशाक उसे ऐसा करने से रोक रही थी।
प्रश्न 4.
उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था? [CBSE]
उत्तर:
स्त्री का लड़का साँप से डसे जाने के कारण मर गया।
प्रश्न 5.
बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?
उत्तर:
बुढ़िया का बेटा ही घर में कमाऊ सदस्य था। वही घर का गुजारा चलाता था। उसकी मृत्यु के बाद घर में ऐसा कोई नहीं था, जो कमाकर उधार लौटा देता, इसलिए बेटे के बिना बुढ़िया को कौन उधार देता।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
प्रश्न 1.
मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्त्व है? [CBSE]
उत्तर:
मनुष्य के जीवन में पोशाक को महत्त्व है। उसकी पोशाक ही समाज में उसका दर्जा तथा अधिकार तय करती है। पोशाक के कारण कभी उसके सब रास्ते खुल जाते हैं और कभी अड़चनें आ घेरती हैं।
प्रश्न 2.
पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है? [CBSE]
अथवा
खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुकने से रोकती है, क्यों? [CBSE]
उत्तर:
पोशाक हमारे लिए उस समय बंधन और अड़चन बन जाती है जब हम अपने से निचले स्तर के व्यक्ति के दुख में शामिल होकर सहानुभूति प्रकट करना चाहते हैं तब पोशाक हमारे आड़े आ जाती है।
प्रश्न 3.
लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया? [CBSE]
उत्तर:
लेखक ने देखा कि वह स्त्री फुटपाथ पर बैठकर फफक-फफककर रोए चली जा रही थी। लेखक की पोशाक तथा स्थिति ऐसी थी कि उसके साथ बाजार में बैठकर उसका हाल-चाल जानना कठिन था। इससे उसे भी संकोच होता तथा लोग भी व्यंग्य करते। इसलिए वह चाहकर भी उसके रोने का कारण नहीं जान पाया।
प्रश्न 4.
भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था? [CBSE]
उत्तर:
बुढिया के पास शहर के निकट डेढ़ बीघा जमीन थी, जिसमें उसका बेटा भगवाना सब्ज़ियाँ और मौसमी फल उगाता था। वह उन्हें बाजार में बेच देता था और होने वाली आय से गुजारा चलाता था।
प्रश्न 5.
लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी? ‘ [CBSE 2012]
उत्तर:
लड़के की मृत्यु के अगले ही दिन उसकी माँ के सामने पोतों की भूख और बहू की बीमारी की समस्या आ खड़ी हुई। पोते-पोतियाँ भूख से बिलबिला रहे थे और बहू बुखार से तप रही थी। घर में पैसा नहीं था। इसलिए वह मजबूरी में पुत्र शोक के अगले ही दिन खरबूजे बेचने चल पड़ी।
प्रश्न 6.
बुढ़िया के दुःख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
उत्तर:
बुढ़िया का दुख देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद इसलिए आ गई क्योंकि बुढिया अपने मृत बेटे का शोक न मना सकी, जबकि उसके पड़ोस की संभ्रांत महिला अपने बेटे की मृत्यु के बाद अढाई मास तक बिस्तर से भी न उठ सकी थी।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए
प्रश्न 1.
बाज़ार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बाज़ार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में तरह-तरह की बातें बना रहे थे। कोई उसे बेहया कह रहा था। किसी ने कहा कि उस स्त्री की नीयत ही ठीक नहीं है। एक आदमी ने कहा कि यह कमीनी औरत है जिसके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान कुछ नहीं है। उसके लिए रोटी का टुकड़ा ही सब कुछ है। एक लाला जी ने कहा कि यह औरत औरों का धर्म-ईमान बिगाड़कर अँधेर मचा रही है। पुत्र शोक के कारण यह सूतक में है। इसलिए उसे इन दिनों में कोई सामान नहीं छूना चाहिए।
प्रश्न 2.
पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला? [CBSE]
उत्तर:
पास-पड़ोस की दुकानों पर पूछने से लेखक को यह पता चला कि बुढिया का तेईस वर्षीय जवान लड़का था। घर में उसकी बहू और पोता-पोती है। उसका लड़का शहर के पास स्थित डेढ़ बीघा जमीन पर कछियारी करता था। इसमें उगने वाली सब्जियों और फलों को बेचकर वह घर का गुजारा चलाता था। परसों जब बुढ़िया का लड़का मुँह अँधेरे खरबूजे तोड़ रहा था तभी गीली मेड़ की तरावट में विश्राम करते साँप पर उसका पैर पड़ गया। उसे साँप ने डॅस लिया। बुढ़िया ने उसके इलाज के लिए झाड़-फेंक और पूजा-अर्चना कराई, पर सब व्यर्थ। इससे उसके बेटे की मृत्यु हो गई।
प्रश्न 3.
लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया माँ ने क्या-क्या उपाय किए? [CBSE]
उत्तर:
बुढ़िया का लड़का भगवाना साँप के डसने से बेहोश हो गया था। जैसे ही बुढ़िया को पता चला, वह उसका विष दूर करने के लिए गाँव के ओझा को बुला लाई। ओझा ने खूब झाड़-फेंक की। परंतु साँप का विष दूर न हो सका। बुढ़िया जो कर सकती थी, उसने किया। उसने ओझा को प्रसन्न करने के लिए नागराज की पूजा भी की। घर में जो आटा और अनाज था, वह भी ओझा के हवाले कर दिया। परंतु इतना करने पर भी उसका पुत्र बच न सका।
प्रश्न 4.
लेखक ने बुढ़िया के दु:ख का अंदाज़ा कैसे लगाया? [CBSE]
उत्तर:
लेखक ने रोती बुढ़िया के दुख का अंदाजा अपने पड़ोस की उस संभ्रांत महिला को याद करके लगाया। उस संभ्रांत महिला का बेटा भी मर गया था। उसके दुख से दुखी महिला अढाई महीने तक पलंग पर पड़ी रही। वह हर दस पंद्रह मिनट में बेहोश हो जाती थी और बेहोश न होने पर आँखों से आँसू बहते रहते थे। उसके सिरहाने दो-दो डॉक्टर सदैव बैठे रहते थे। हर दम उसके सिर पर बरफ़ रखी जाती थी। ऐसी दशा को याद करके लेखक ने जान लिया कि इस बुढ़िया का दुख भी उतना ही गहरा है, पर उसके पास शोक मनाने का समय नहीं है।
प्रश्न 5.
इस पाठ का शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE]
उत्तर:
इस पाठ का शीर्षक है-‘दुःख का अधिकार’। यह शीर्षक एकदम उचित है। लेखक यह कहना चाहता है कि यद्यपि दुःख प्रकट करना हर व्यक्ति का अधिकार है। परंतु हर कोई इसे संभव नहीं कर पाता। एक महिला संपन्न है। उस पर कोई जिम्मेदारी नहीं है। उसके पास पुत्र शोक मनाने के लिए डॉक्टर हैं, सेवा-कर्मी हैं, साधन हैं, धन है, समय है। परंतु गरीब लोग अभागे हैं। वे चाहें भी तो शोक प्रकट करने के लिए आराम से दो आँसू नहीं बहा सकते। सामने खड़ी भूख, गरीबी और बीमारी नंगा नाच करने लगती है। अतः दु:ख प्रकट करने का अधिकार गरीबों को नहीं है।
(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए
प्रश्न 1.
जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
अथवा
लेखक ने पतंग का उदाहरण क्यों दिया है? स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2012]
उत्तर:
उक्त पंक्ति का आशय यह है कि जब व्यक्ति ज्यादा महँगी और अच्छी पोशाक पहन लेता है तो उसकी सामाजिक स्थिति बढ़ जाती है। वह संपन्न व्यक्तियों की श्रेणी में आ जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति जब अपने से कमजोर स्थिति वाले व्यक्ति के दुख के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करना चाहता है तो उसकी पोशाक उसे गरीब व्यक्ति के स्तर तक नहीं जाने देती है। यह स्थिति वैसी होती है जैसे हवा की लहरों के कारण पतंग सीधे नीचे जमीन पर नहीं आ पाती है।
प्रश्न 2.
इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है।
उत्तर:
एक राह चलता आदमी भगवाना की माँ को बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन ख़रबूजे बेचते देखकर कहता है-ये गरीब लोग कमीने होते हैं। इनका अपने बेटा-बेटी से, पति-पत्नी से या धर्म-ईमान से कोई लगाव नहीं होता। ये केवल एक रोटी के टुकड़े के लिए अपनी सारी भावनाएँ तथा आस्थाएँ बेच देते हैं।
प्रश्न 3.
शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और ……….. दुःखी होने का भी एक अधिकार होता है। [CBSE 2012]
उत्तर:
जब किसी गरीब और विवश व्यक्ति के घर में भूख से रोते-बिलखते बच्चे, भूखी और बीमार कोई अन्य सदस्य हो तो शोक मनाने की बात कैसे सोची जा सकती है, शोक कैसे मनाया जा सकता है। उन रोते बिलखते बच्चों के लिए रोटी और बीमार सदस्य की दवा का प्रबंध होना आवश्यक है। ऐसा करने के कारण गरीब व्यक्ति को शोक मनाने की सुविधा भी नहीं। ऐसे में वह क्या करे। दुखी होने का अधिकार भी उन्हीं लोगों के पास है जिनके पास धन-दौलत और तरह-तरह की सुविधाएँ हैं।
अन्य पाठ्यचर्या प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
खरबूजे बेचने वाली महिला पर लोग टिप्पणी क्यों कर रहे थे?
उत्तर-
खरबूजे बेचने वाली महिला पर लोग इसलिए टिप्पणी कर रहे थे क्योंकि वे उस महिला के दुख को नहीं समझ पा रहे थे। उन्हें तो बस उस महिला की लालच दिखाई दे रही थी।
प्रश्न 2.
बूढ़ी महिला द्वारा खरबूजे बेचे जाने को लोग घृणित कार्य क्यों समझ रहे थे? उत्तर- बूढ़ी महिला द्वारा खरबूजे बेचे जाने को लोग घृणित कार्य इसलिए समझ रहे थे क्योंकि उस महिला के घर में सूतक था।
इस सूतक में उसके हाथ से खरबूजे खरीदने और खाने से उनका धर्म भ्रष्ट हो सकता था। प्रश्न 3. बुढ़िया को खरबूजे बेचते देख लोग किन-किन विशेषणों का प्रयोग कर रहे थे? उनका ऐसा कहना कितना उचित था?
उत्तर-
बुढ़िया को खरबूजे बेचते देख लोग ‘लालची’, ‘बेहया’, ‘कमीने लोग’ जैसे विशेषणों का प्रयोग कर रहे थे। उनका ऐसा कहना तनिक भी उचित नहीं था, क्योंकि बुढिया लालच या धन कमाने के लिए खरबूजे नहीं बेच रही थी। खरबूजे बेचना उसकी मज़बूरी थी।
प्रश्न 4.
खरबूजे बेचने आई महिला फफक-फफककर क्यों रोए जा रही थी?
उत्तर-
खरबूजे बेचने आई महिला इसलिए फफक-फफककर रोए जा रही थी क्योंकि एक दिन पहले ही उसका जवान बेटा साँप के हँसने से चल बसा था। उसके घर में पोते-पोती और बीमार बहू के लिए कुछ भी खाने को न था। शोक मनाने की जगह खरबूजे बेचने की विवशता और बेटे के दुख के कारण वह फफक-फफक रोए जा रही थी।
प्रश्न 5.
बुढ़िया की उस विवशता का उल्लेख कीजिए जिसके कारण उसे सूतक में भी खरबूजे बेचने आना पड़ा?
उत्तर-
बुढ़िया के जवान बेटे को साँप ने डॅस लिया था। ओझा से झाड़-फेंक करवाने और नागपूजा के बाद दान-दक्षिणा देने में घर का अनाज और आटा चला गया। उसके कफ़न के इंतजाम में साधारण जेवर भी बिक गए। भूख से बिलबिलाते पोते पोतियों और बीमार बहू की भूख शांत करने की विवशता में उसे सूतक में भी खरबूजे बेचने आना पड़ा।
प्रश्न 6.
आज अच्छी पोशाक की आवश्यकता एवं महत्त्व क्यों बढ़ गया है?
उत्तर-
आज अच्छी पोशाक की आवश्यकता एवं महत्त्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि अच्छी पोशाक से पता चलता है कि व्यक्ति की हैसियत अच्छी है। पोशाक के कारण व्यक्ति सम्मान का पात्र समझा जाता है। पोशाक से ही कुछ लोगों के कठिन काम सरलता से बन जाते हैं।
प्रश्न 7.
बुढ़िया से खरबूजे खरीदने में लोगों को क्या डर सता रहा था?
उत्तर-
बुढ़िया अपने जवान बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही खरबूजे बेचने बाजार में बैठी थी। उसके घर में सूतक था। यह बात लोगों को पता थी। बुढ़िया से खरबूजे खरीदने पर लोगों को यह डर सता रहा था कि उन्हें पातक लग जाएगा और उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा।
प्रश्न 8.
अपने बेटे का इलाज ओझा से कराना बुढिया को किस तरह भारी पड़ गया?
उत्तर-
जवान बेटे को साँप ने डॅस लिया है, उसे सुनते ही बुढ़िया बावली हो गई। वह भागकर ओझा को बुला लाई ओझा ने झाड़-फूक किया, नाग पूजा की, दान-दक्षिणा लिया किंतु उसके बेटे भगवाना की जान नहीं बच सकी। इस तरह ओझा से इलाज कराना बुढ़िया को भारी पड़ गया।
प्रश्न 9.
भगवाना के इलाज और उसकी विदाई के बाद घर की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
भगवाना के इलाज में ही घर का आटा और अनाज तक खत्म हो गया था। उसकी मृत्यु के बाद उसके लिए कफ़न के इंतजाम में छोटे-मोटे आभूषण तक बिक गए। अब उसके घर में खाने के भी लाले पड़ गए। इस तरह घर की आर्थिक स्थिति बिलकुल खराब हो गई।
प्रश्न 10.
भगवान का मुँह अँधेरे खरबूजे तोड़ना किस तरह जानलेवा साबित हुआ?
उत्तर-
भगवाना अपने खेत में मुँह-अँधेरे ही पके खरबूजे तोड़ना चला गया। वहाँ गीली मेड़ की तरावट में विश्राम करते हुए साँप पर उसका पैर पड़ गया जिसे वह हल्का अँधेरा होने के कारण देख न सका था। साँप के हँसने से उसकी मृत्यु हो गई। इस तरह मुँह अँधेरे खरबूजे तोड़ना उसके लिए जानलेवा सिद्ध हुआ।
प्रश्न 11.
बुढ़िया को रोते देखकर लेखक चाहकर भी क्या न कर सका?
उत्तर-
खरबूजे बेचने वाली बुढ़िया को रोता देखकर लेखक ने उसके दुख को महसूस किया। वह बुढ़िया के पास बैठकर अपने हृदय की अनुभूति प्रकट करना चाहता था, पर अपनी पोशाक के कारण चाहकर भी ऐसा न कर सका।
प्रश्न 12.
बुढ़िया के दुख से दुखी लेखक को किसकी याद आई?
उत्तर-
खरबूजे बेचने आई महिला को रोती देखकर लेखक ने उसके दुख को महसूस किया। वह दुखी हो गया। बुढ़िया को शोक मनाने का भी अवसर न मिल पाया था, यह सोचकर उसे अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद आई, जो इस स्थिति में दो-ढाई महीने तक बिस्तर से भी न उठ पाई थी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बुढ़िया के बेटे की मृत्यु से उसे ज्ञान और माल दोनों की हानि हुई। ‘दुख का अधिकार’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
बुढ़िया का तेईस वर्षीय जवान बेटा ही उसका एकमात्र कमाऊ सदस्य था। वह शहर के पास की डेढ़ बीघा भूमि पर सब्ज़ियाँ उगाकर घर का गुजारा चलाता था। उसकी मृत्यु होने से घर में कोई कमाने वाला सदस्य न बचा। उसकी मृत्यु साँप के काटने से हुई थी। साँप के काटने का इलाज करवाने के लिए उसकी माँ ओझा को बुला लाई थी जिसने झाड़-फेंक और नाग-पूजा के नाम पर तथा दान-दक्षिणा के रूप में अमाज और आटा तक चला गया। उसके लिए कफ़न की व्यवस्था करते हुए साधारण से बचे-खुचे जेवर भी बिक गए जिससे बुढ़िया के पोते-पोती को खाने के लाले पड़ गए। इस प्रकार बुढ़िया के बेटे की मृत्यु से उसे जान और माल दोनों की हानि उठानी पड़ी।
प्रश्न 2.
भगवाना कौन था? उसकी मृत्यु किस तरह हुई ?
उत्तर
भगवाना खरबूजे बेचने वाली महिला का तेईस वर्षीय बेटा था। वह अपने घर का एक मात्र कमाऊ सदस्य था जो शहर के पास डेढ़ बीघे जमीन पर सब्ज़ियाँ उगाकर गुजारा करता था। वह मुँह अँधेरे खेत में पके तरबूजे तोड़ने गया था ताकि उन्हें इकट्ठा कर बाजार में बेच सके। खेत की गीली मेड़ की तरावट में एक साँप विश्राम कर रहा था। भगवाना उसे देख न पाया और उसका पैर साँप पर पड़ गया। साँप ने उसे डॅस लिया। साँप का जहर उतारने के लिए ओझा को बुलवाया गया, पर विष के असर से उसका शरीर काला पड़ता गया और उसकी मृत्यु हो गई।
प्रश्न 3.
कभी-कभी पोशाकें मनुष्य के लिए बाधक सिद्ध होती हैं। ऐसी पोशाकों की तुलना किससे की है और क्यों ?
उत्तर
मनुष्य जब अच्छी पोशाक पहनकर कहीं आ जा रहा होता है, उसी समय जब वह निम्न श्रेणी के समझे जाने वालों को दुखी देखता है तो वह उसके दुख से द्रवित होकर उसके दुख के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करना चाहता है परंतु वह अपनी अच्छी पोशाक के कारण चाहकर भी उसके पास जाकर ऐसा नहीं कर पाता है। लेखक ने ऐसी पोशाकों की तुलना । हवा में लहराती उन कटी पतंगों से की है जो हवा के झोकों के कारण सीधी जमीन पर नहीं गिर पाती हैं। इसी तरह पोशाकें भी मनुष्य को अपनी स्थिति से नीचे जाने से रोकती हैं।
प्रश्न 4.
सूतक’ क्या है? समाज में इसके प्रति क्या धारणा फैली है? ‘दुख का अधिकार’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
हिंदू परिवारों में जब किसी की मृत्यु होती है तो उस दिन से तेरह दिनों तक घर को अपवित्र माना जाता है। इन दिनों में कोई मांगलिक और शुभ समझे जाने वाले कार्य नहीं किए जाते हैं। तेरह दिनों की इस अपवित्रता की स्थिति को सूतक कहते हैं। समाज में सूतक के प्रति यह धारणा फैली है कि इस स्थिति में उस परिवार के हर सदस्य और हर वस्तु अपवित्र होती हैं। इन सदस्यों के हाथ से ली गई वस्तुएँ खाने-पीने से व्यक्ति का धर्म-ईमान नष्ट हो जाता है और वह पाप का भागीदार बनता है। ऐसे में लोग सूतक से बचने का हर संभव प्रयास करते हैं।
प्रश्न 5.
‘दुख का अधिकार’ पाठ में किस सामाजिक बुराई की ओर संकेत किया गया है? इसके कारणों पर प्रकाश डालते हुए इससे होने वाली हानियों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
‘दुख का अधिकार’ पाठ में साँप के काटने का इलाज झाड़-फेंक और ओझा से नाग देवता की पूजा-अर्चना कराने तथा अंत्येष्टि जैसे कार्य पर अपव्यय करने जैसी सामाजिक बुराई की ओर संकेत किया गया है। इन बुराइयों का कारण अशिक्षा, रूढ़िवादिता, धर्म का भय तथा जागरुकता का अभाव है जिसके कारण अनपढ़ और ग्रामीण लोग इन बुराइयों का सरलता से शिकार बन जाते हैं। इनमें फँसकर वे अपना धन और समय ही नहीं गॅवाते बल्कि पीड़ित और अपने प्रिय व्यक्ति की जान से भी हाथ धो बैठते हैं। इसकी सबसे अधिक मार गरीब परिवारों पर पड़ती है, जिन्हें बाद में खाने के भी लाले पड़ जाते हैं।
प्रश्न 6.
‘दुख का अधिकार’ पाठ का उद्देश्य मानवीय संवेदना जगाना है।’ पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘दुख का अधिकार’ पाठ में खरबूजे बेचने वाली महिला की दुखी मनोदशा का ऐसा चित्रण करता है जो किसी भी संवेदनशील मनुष्य के हृदय को झकझोर जाता है। हमारे समाज में ऐसे व्यक्ति भी हैं जो संवेदनहीनता के कारण खरबूजे बेचने वाली जैसी दुखी बेवश और शोकसंतप्त के दुख को महसूस नहीं कर पाते हैं। उनके लिए ऐसी दुखी महिला घृणा और उपहास के पात्र नज़र आते हैं। ये लोग दुखी व्यक्ति पर कटाक्ष करने से नहीं चूकते हैं। दूसरी ओर समाज में लेखक जैसे भी लोग हैं जो दूसरों को शोकसंतप्त देखकर मन से दुखी होते हैं परंतु कर्म करने के समय उनकी पोशाक आड़े आ जाती है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य यही है कि वे दूसरों के दुख की अनुभूति करें और दुखी व्यक्ति पर हँसना छोड़कर उसके साथ बैठकर उससे सच्ची सहानुभूति प्रकट करें।