NCERT Class 9 Hindi Chapter 3 एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 3 एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास
मौखिक
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1.
अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?
उत्तर:
अग्रिम दल का नेतृत्व अभियान दल के उपनेता ‘प्रेमचंद’ कर रहे थे।
प्रश्न 2.
लेखिका को सागरमाथा नाम क्यों अच्छा लगा?
उत्तर:
‘सागरमाथा’ का तात्पर्य है-समुद्र का माथा अर्थात् सबसे ऊँचा स्थान। हिमालय के सबसे ऊँचे पर्वत को सागरमाथा कहना पूरी तरह सार्थक था। इसलिए लेखिका को यह नाम अच्छा लगा।
प्रश्न 3.
लेखिका को ध्वज जैसा क्या लगा?
उत्तर:
लेखिका को ध्वज जैसा वह बड़ा-सा बरफ़ का फूल (प्लूम) लगा जो पहाड़ के शिखर पर 150 किलोमीटर से अधिक तेज़ हवा के चलने और बरफ़ के उड़ने से बनता है।
प्रश्न 4.
हिमस्खलन से कितने लोगों की मृत्यु हुई और कितने घायल हुए?
उत्तर:
हिमस्खलन से चार शेरपा कुलियों को चोट लगी थी। एक की मृत्यु हो गई।
प्रश्न 5.
मृत्यु के अवसाद को देखकर कर्नल खुल्लर ने क्या कहा?
उत्तर:
पर्वतारोहियों में से दो व्यक्तियों की मृत्यु की बात सुनकर अन्य आरोहियों के चेहरे पर आए अवसाद को देखकर कर्नल खुल्लर ने कहा, कि एवरेस्ट जैसे महान अभियान के खतरों और कभी-कभी तो मृत्यु को भी आदमी को सहज भाव से स्वीकारना चाहिए।
प्रश्न 6.
रसोई सहायक की मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर:
रसोई सहायक की मृत्यु जलवायु अनुकूल न होने के कारण हुई।
प्रश्न 7.
कैंप-चार कहाँ और कब लगाया गया?
उत्तर:
कैंप चार साउथकोल जो ‘पृथ्वी पर बहुत अधिक कठोर’ जगह के नाम से प्रसिद्ध है, में 29 अप्रैल, 1984 को लगाया गया।
प्रश्न 8.
लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय किस तरह दिया?
उत्तर-
लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय एक नौसिखिया पर्वतारोही के रूप में दिया।
प्रश्न 9.
लेखिका की सफलता पर कर्नल खुल्लर ने उसे किन शब्दों में बधाई दी?
उत्तर:
लेखिका की सफलता पर बधाई देते हुए कर्नल खुल्लर ने कहा, “मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता-पिता को बधाई देना चाहूँगा।” उन्होंने यह भी कहा कि देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी, जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
प्रश्न 1.
नज़दीक से एवरेस्ट को देखकर लेखिका को कैसा लगा? [CBSE]
अथवा
लेखिका किसे देखकर भौंचक्की रह गई और देर तक निहारती रही? [CBSE]
उत्तर:
एवरेस्ट को नजदीक से देखकर लेखिका को इतना अच्छा लगा कि वह भौंचक्की होकर देखती रही। वह एवरेस्ट, ल्होत्से और नुत्से से घिरी टेढ़ी-मेढ़ी बर्फीली नदी को निहारती रही।
प्रश्न 2.
डॉ. मीनू मेहता ने क्या जानकारियाँ दीं? [CBSE]
उत्तर:
डॉक्टर मीनू मेहता ने अभियान दल के सदस्यों को एल्यूमिनियम की सीढ़ियों से अस्थायी पुल बनाने, लट्ठों और रस्सियों का उपयोग करने, बरफ़ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियाँ बाँधने जैसे अनेक अभियांत्रिक कार्यों की जानकारी दी।
प्रश्न 3.
तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ़ में क्या कहा? [CBSE]
उत्तर:
तेनजिंग ने लेखिकों की प्रशंसा में निम्नलिखित शब्द कहे-“तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो। तुम्हें तो शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।’
प्रश्न 4.
लेखिका को किनके साथ चढ़ाई करनी थी?
उत्तर:
लेखिका को अगले दिन की, जय और मीनू के साथ चढ़ाई करनी थी। वे भारी बोझ लेकर धीरे-धीरे बिना ऑक्सीजन के चढ़ाई कर रहे थे, जो अभी तक लेखिका के पास नहीं आ सके थे।
प्रश्न 5.
लोपसांग ने तंबू का रास्ता कैसे साफ़ किया? [CBSE]
उत्तर:
लोपसांग ने स्विस छुरी की सहायता से तंबू का रास्ता साफ़ किया। उसने बड़े-बड़े हिमपिंडों को सामने से हटाया तथा चारों तरफ फैली कठोर बर्फ़ की खुदाई की। तब जाकर बाहर निकलने का रास्ता साफ़ हो सका।
प्रश्न 6.
साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे शुरू की?
उत्तर:
साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की तैयारी करने के लिए सुबह चार बजे उठ गई, बरफ़ पिघलाया और चाय बनाई। कुछ बिस्कुट और आधी चाकलेट का नाश्ता करने के बाद वह सवेरे पाँच बजे तंबू से निकल पड़ी।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखि
प्रश्न 1.
उपनेता प्रेमचंद ने किन स्थितियों से अवगत कराया? [CBSE]
उत्तर:
उपनेता प्रेमचंद ने लेखिका को हिमपात के खतरों से अवगत कराया। उसने बताया कि उनके अग्रिम दल ने कैंप एक तक का रास्ता साफ़ कर दिया है। यह कैंप हिमपात के ठीक ऊपर है। पुल बनाकर, रस्सियाँ बाँधकर तथा झंडियों से रास्ता चिह्नित कर दिया गया है। परंतु हिमपात अनियमित और अनिश्चित होता है। यद्यपि बीच में पड़ने वाली ग्लेशियर की नदी पर रास्ता बना दिया गया है किंतु हिमपात और अधिक हो गया तो रास्ता बनाने का काम फिर से करना पड़ सकता है।
प्रश्न 2.
हिमपात किस तरह होता है और उससे क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर:
पहाड़ी की ऊँची-ऊँची चोटियों पर हिमपात अनियमित ढंग से होता है और इसमें अनिश्चित बदलाव होते रहते हैं। अनियमित रूप से बरफ़ का गिरना ही हिमपात है। तेज हवा चलने से हिमपात की मात्रा बढ़ जाती है। सूखी बरफ़ हवा में उड़ने लगती है तथा दृश्यता शून्य तक पहुँच जाती है। इससे सारी परिस्थितियाँ बदल जाती हैं।
प्रश्न 3.
लेखिका के तंबू में गिरे बर्फ पिंड का वर्णन किस तरह किया गया है? [CBSE]
अथवा
लेखिका के साथ हुए हादसे का वर्णन अपने शब्दों में करें।।[CBSE]
उत्तर:
लेखिका के तंबू में गिरा बर्फ़ का पिंड बहुत भयानक था। वह ल्होत्से ग्लेशियर से टूट कर नीचे गिरा था। उसके कारण एक विशाल हिमपुंज का निर्माण हो गया था। यह हिमपिंड अपने में अनेक बड़े-बड़े हिमखंडों को समाए हुए था। यह विशाल हिमखंड एक्सप्रेस रेलगाड़ी की तेज़ गति और भयंकर आवाज के साथ ढलान से नीचे, आया था। इसके कारण पर्वतारोहियों को कैंप पूरी तरह तहस-नहस हो गया। आश्चर्य की बात यह रही कि चोट सभी को लगी किंतु मरा कोई नहीं।
प्रश्न 4.
लेखिका को देखकर ‘की’ हक्का-बक्का क्यों रह गया?
उत्तर:
लेखिका को देखकर ‘की’ इसलिए हक्का-बक्का रह गया क्योंकि लेखिका उससे पहले साउथ कोल कैंप पर पहुँच चुकी थी, जबकि वह साउथकोल की ओर ऊपर बढ़ रहा था। उसने देखा लेखिका कैंप में विश्राम न करके उसके लिए चाय और जूस लिए नीचे उतरती आ रही है जबकि उसे कैंप में आराम करना चाहिए। लेखिका में ऐसी सेवा, सहयोग की भावना, एवं संवेदनशीलता देखकर ‘को’ हक्का-बक्का होना ही था।
प्रश्न 5.
एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल कितने कैंप बनाए गए? उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए निम्नलिखित कैंप बनाए गए
बेस कैंप – यह कैंप काठमांडु के शेरपालैंड में लगाया गया। पर्वतीय दल के नेता कर्नल खुल्लर यहीं रहकर एक-एक गतिविधि का संचालन कर रहे थे। उपनेता प्रेमचंद ने भी हिमपात संबंधी सभी कठिनाइयों का परिचय यहीं दिया।
कैंप-एक – यह हिमपात से ऊपर 6000 मीटर की ऊँचाई पर था। यहाँ हिमपात से सामान उठाकर कैंप तक लाए जाने । का अभ्यास भी किया गया।
कैंप-तीन – यह ल्होत्से पहाड़ियों के आँगन में स्थित था। यहीं नाइलॉन के कैंपों में लेखिका और उसके साथी सोए थे कि एक हिमखंड उन पर आ गिरा था।
कैंप-चार – यह समुद्र-तट से 7900 मीटर की ऊँचाई पर स्थित था। यहीं से साउथ कैंप और शिखर कैंप के लिए चढ़ाई की गई।
साउथ कोल कैंप-यहीं से अंतिम दिन की चढ़ाई शुरू हुई।
शिखर कैंप-यह पर्वत की सर्वोच्च चोटी से ठीक नीचे स्थित था। चोटी पर चढ़ने से पहले यहीं आराम करके चायपान किया गया।
प्रश्न 6.
चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी? [CBSE]
उत्तर:
चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी शंक्वाकार थी। यह चोटी इतनी पतली हो गई थी कि एक साथ दो व्यक्ति साथ-साथ नहीं खड़े हो सकते थे। वहाँ खड़ा हो पाना कठिन हो रहा था। उसके आगे तो बस हज़ारों मीटर, दूर-दूर तक बस सीधी ढलान ही ढलान थी।
प्रश्न 7.
सम्मिलित अभियान में सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय बचेंद्री के किस कार्य से मिलता है? [CBSE]
उत्तर:
सम्मिलित अभियान में आपसी सहायता और सहयोग से ही कार्य संपन्न होते हैं। बचेंद्री पाल ने अपने व्यवहार से इस सहयोग भावना का परिचय दिया। उसने देखा कि अभी उसके साथी की, जय और मीनू कैंप तक नहीं पहुँचे, तो वह उनके लिए चाय और जूस बनाकर रास्ते में जा पहुँची। उस खतरनाक रास्ते पर जाना कठिन तथा खतरनाक था। फिर भी बचेंद्री पाल ने यह खतरा उठाया। उसने ‘की’ और ‘जय’ को रास्ते में जाकर पेय पदार्थ पिलाया।
(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
प्रश्न 1.
एवरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों को और कभी-कभी तो मृत्यु भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करनी चाहिए। [CBSE 2012]
उत्तर:
आशय यह है कि एवरेस्ट पर चढ़ाई का रास्ता अत्यंत दुर्गम और खतरनाक होता है। इस अभियान में प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे-हिमपात, भूस्खलन, बरफ़ की चट्टाने गिरने से दुर्घटनाओं का होना आमबात है। इतने बड़े अभियान में ऐसी बातों को अत्यंत सहजभाव से लिया जाता है। इन घटनाओं से डरने और विचलित होने वाला व्यक्ति इसमें सफल नहीं हो सकता है।
प्रश्न 2.
सीधे धरातल पर दरार पड़ने का विचार और इस दरार का गहरे-चौड़े हिम-विदर में बदल जाने का मात्र खयाल ही बहुत डरावना था। इससे भी ज्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि हमारे संपूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा।
उत्तर:
हिमपात होने से कभी-कभी धरती में ही दरार पड़ जाती है। यह दरार इतनी गहरी और चौड़ी हो जाती है कि धरती फट जाती है। उसके बीच गहरी खाई-सी बन जाती है। यह विचार आते ही मन में बहुत डर लगता है। इससे भी भयानक यह जानकारी थी कि जितने समय तक ये पर्वतारोही और कुली चढाई अभियान पर रहेंगे, हिमपात होता रहेगा और बर्फ गिरने की भयानक घटनाएँ होती रहेंगी। यह हिमपात पर्वतारोहियों के शरीर को छूता रहेगा।
प्रश्न 3.
बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ को चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया।
उत्तर:
आशय यह है कि लेखिका ने अपने आराध्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए अपने साथ लाए दुर्गा की तस्वीर और हनुमान चालीसा’ को लाल कपड़े में लपेटा, पूजा-अर्चना किया और बरफ़ में दबा दिया और इस सफलता हेतु मन ही मन धन्यवाद दिया। उसने अपने माता-पिता को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता और आदर का भाव व्यक्त किया।
अन्य पाठ्यचर्या प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
‘सागरमाथा’ क्या है? लेखिका को यह नाम कैसा लगा?
उत्तर-
‘सागरमाथा’ एवरेस्ट का दूसरा नाम है। एवरेस्ट का यह नाम नेपालियों में प्रसिद्ध है। लेखिका को एवरेस्ट का यह नाम अच्छा लगा।
प्रश्न 2.
एवरेस्ट अभियान दल कब रवाना हुआ? उससे पहले अग्रिम दल क्यों भेजा गया?
उत्तर-
एवरेस्ट अभियान दल दिल्ली से काठमांडू के लिए 7 मार्च को हवाई जहाज से रवाना हुआ। उससे पहले अग्रिम दल को इसलिए भेजा गया ताकि ‘बेस कैंप’ पहुँचने से पहले दुर्गम हिमपात के रास्ते को साफ़ कर सके।
प्रश्न 3.
लेखिका को बड़ा फूल (प्लूम) कैसा लगा? यह फूल कैसे बनता है?
उत्तर-
लेखिका को बड़ा फूल (प्लूम) पर्वत-शिखर पर लहराता हुआ ध्वज-सा लग रहा था। यह फूल पर्वत की ऊपरी शिखर पर लगभग 150 किलोमीटर या इससे भी अधिक गति से हवाएँ चलने पर बनता है।
प्रश्न 4.
वह कौन-सी बात थी, जो लेखिका को डराने के लिए काफ़ी थी?
उत्तर-
पर्वत शिखरों पर 150 किलोमीटर या इससे भी अधिक गति से तूफ़ानी और बरफ़ीली हवाएँ चलती हैं। शिखर पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को दक्षिण पूर्वी पहाड़ी पर इन तूफ़ानों को झेलना पड़ता है। यह बात लेखिका को डराने के लिए काफ़ी थी।
प्रश्न 5.
शेरपा कुली की मृत्यु कैसे हुई थी?
उत्तर-
खंभु हिमापात पर जाने वाले अभियान दल के रास्ते के बाईं तरफ सीधी पहाड़ी धसक गई थी। इस कारण ल्होत्से की ओर से एक बहुत बड़ी चट्टान नीचे खिसक आई थी, जिससे एक शेरपा कुली की मृत्यु हो गई थी।
प्रश्न 6.
एवरेस्ट अभियान की पहली बाधा कौन-सी थी? इस बाधा का पता लेखिका को कैसे चला?
उत्तर-
एवरेस्ट अभियान की पहली बाधा खंभु हिमपात थी। लेखिका को इस बाधा का पता अग्रिम दल का नेतृत्व कर रहे उपनेता प्रेमचंद से चला।
प्रश्न 7.
अग्रिमदल ने एवरेस्ट अभियान दल की मदद किस तरह की?
उत्तर-
अग्रिम दल एवरेस्ट अभियान दल से पहले ही खंभु हिमपात तक पहुँच गया और वहाँ तक का रास्ता साफ़ कर दिया। उन्होंने पुल बनाकर, रस्सियाँ बाँधकर झंडियों से रास्ते को चिनित करके सभी कठिनाइयों का जायजा ले लिया था।
प्रश्न 8.
तीसरे दिन की किस सफलता को सुनकर कर्नल खुल्लर खुश हो रहे थे?
उत्तर-
हिमपात से कैंप तक की चढ़ाई के लिए तीसरा दिन नियत था। लेखिका रीता गोंबू के साथ आगे बढ़ रही थी तथा वह वॉकी-टॉकी से हरकदम की जानकारी कर्नल खुल्लर को दे रही थी। कर्नल खुल्लर यह जानकार खुश हुए कि कैंप एक तक केवल दो महिलाएँ ही पहुँच सकी थी।
प्रश्न 9.
लोपसांग ने लेखिका की जान किस तरह से बचाई ?
उत्तर-
जब लेखिका अपने तंबू में बरफ़ में दबी थी तब लोपसांग ने अपनी स्विस छुरी से तंबू का रास्ता साफ़ करने में जुट गए उन्होंने लेखिका के चारों ओर जमे कड़े बरफ़ की खुदाई की और लेखिका को बरफ़ की कब्र से खींच निकाला।
प्रश्न 10.
कर्नल खुल्लर ने किस कार्य को जबरदस्त साहसिक बताया?
उत्तर-
लेखिका अपने दल के साथ एवरेस्ट अभियान पर जाती हुई 16 मई को सवेरे कैंप-दो पर पहुँची। जिस शेरपा की टाँग टूटी थी उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर नीचे लाए। इस कार्य को कर्नल खुल्लर ने इतनी ऊचाई पर सुरक्षा कार्य का एक जबरदस्त साहसिक कार्य बताया।
प्रश्न 11.
बचेंद्रीपाल ने जूस और चाय लेकर नीचे जाने का जोखिम क्यों लिया?
उत्तर-
शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं इसलिए उन्हें अपने दल के सदस्यों की मदद करने का जोखिम उठाना चाहिए।
प्रश्न 12.
लेखिका अंगदोरजी के साथ एवरेस्ट अभियान पर आगे क्यों चल पड़ी?
उत्तर-
लेखिका बचेंद्री पाल अंगदोरजी के साथ अभियान पर इसलिए चल पड़ी क्योंकि अंगदोरजी बिना आक्सीजन के चढ़ाई करने वाला था। इस कारण उसके पैर ठंडे पड़ जाते थे। वह ऊँचाई पर लंबे समय तक खुले में और रात्रि में शिखर कैंप पर नहीं जाना चाहता था। उसके साथ कोई और जाने को तैयार न था।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
15-16 मई, 1984 की किस घटना से लेखिका को आश्चर्य हुआ?
उत्तर-
15-16 मई, 1984 को ल्होत्से की सीधी ढलान पर लगाए गए कैंप में पर्वतारोहियों का दल ठहरा था। रात साढ़े बारह बजे एक लंबा बरफ़ का पिंड हमारे कैंप के ठीक ऊपर ल्होत्से ग्लेशियर से टूटकर नीचे आ गिरा था और उसका विशाल हिमपुंज बना गया था। हिमखंडों, बरफ़ के टुकड़ों तथा जमीं हुई बरफ़ के इस विशालकाय पुंज ने, एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी की तेज़ गति और भीषण गर्जना के साथ, सीधी ढलान से नीचे आते हुए कैंप को तहस-नहस कर दिया। वास्तव में हर व्यक्ति को चोट लगी थी। यह एक आश्चर्य था कि किसी की मृत्यु नहीं हुई थी।
प्रश्न 2.
साउथ कोल पहुँचते ही लेखिका तैयारियों में क्यों जुट गई और उसकी चिंता का कारण क्या था?
उत्तर
लेखिका जैसे साउथ कोल पहुँची, उसने अगले दिन की अपनी महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी। उसने खाना, कुकिंग गैस तथा कुछ ऑक्सीजन सिलिंडर इकट्ठे किए। जब दोपहर डेढ़ बजे बिस्सा आया, उसने लेखिका को चाय के लिए पानी गरम करते देखा। की, जय और मीनू अभी बहुत पीछे थे। वह चिंतित थी क्योंकि उसे अगले दिन उनके साथ ही चढ़ाई करनी थी। वे धीरे-धीरे आ रहे थे क्योंकि वे भारी बोझ लेकर और बिना ऑक्सीजन के चल रहे थे।
प्रश्न 3.
साउथकोल से आगे बढ़ते हुए लेखिका को क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी पड़ीं और क्यों?
उत्तर-
अंगदोरजी के साथ साउथकोल से आगे बढ़ने पर लेखिका ने देखा कि बाहर हलकी-हलकी हवा चल रही थी और ठंड भी बहुत अधिक थी। लेखिका अपने आरोही उपस्कर में अच्छी स्थिति में थी। वह अंगदोरजी के साथ निश्चित गति से आगे बढ़ी जा रही थी। रास्ते में जमे हुए बरफ़ की सीधी व ढलाऊ चट्टानें सख्त और भुरभुरी जो शीशे की चादरों जैसी थीं। लेखिका को बरफ़ काटने के लिए फावड़े का इस्तेमाल करना पड़ा और सख्ती से फावड़ा चलाना पड़ा ताकि बरफ़ कट जाए। उसने चलते हुए उन खतरनाक स्थलों पर अत्यंत सावधानी से कदम उठाया।
प्रश्न 4.
अंगदोरजी क्या सुनकर आनंदित हुए? उन्होंने लेखिका को क्या बताया?
उत्तर-
साउथकोल कैंप से अंगदोरजी के साथ लेखिका विपरीत परिस्थितियों में यात्रा करते हुए आगे बढ़ रही थी। वे दो घंटे से कम संमय में ही शिखर कैंप पर पहुँच गए। अंगदोरजी ने पीछे उससे मुड़कर देखा कहा कि क्या वह थक गई है। उसने जवाब दिया, ‘नहीं।” जिसे सुनकर वे बहुत अधिक आश्चर्यचकित और आनंदित हुए। उन्होंने कहा कि पहलेवाले दल ने शिखर कैंप पर पहुँचने में चार घंटे लगाए थे और यदि हम इसी गति से चलते रहे तो हम शिखर पर दोपहर एक बजे एक पहुँच जाएँगे।
प्रश्न 5.
लेखिका ने अंगदोरजी के प्रति किस तरह धन्यवाद ज्ञापित किया? इस पर उनकी प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर-
ऐवरेस्ट के शिखर पर पहुँची भाव विभोर लेखिका ने ईश्वर और अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के बाद उठी और अपने दोनों हाथ जोड़कर अपने रज्जु-नेता अंगदोरजी के प्रति आदर भाव से झुकी। अंगदोरजी जिन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और उसे लक्ष्य तक पहुँचाया। लेखिका ने उन्हें बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट की दूसरी चढाई चढ़ने पर बधाई भी दी। उन्होंने गले से लगाया और उसके कानों में फुसफुसाए, “दीदी, तुमने अच्छी चढ़ाई की। मैं बहुत प्रसन्न हूँ।”