Bihar Board 12th Entrepreneurship Important Questions Short Answer Type Part 2 in Hindi

 Bihar Board 12th Entrepreneurship Important Questions Short Answer Type Part 2 in Hindi

Bihar Board 12th Entrepreneurship Important Questions Short Answer Type Part 2 in Hindi

प्रश्न 1.
साहसी के दो मुख्य कार्य बताएँ।
उत्तर:
साहसी के दो कार्य निम्नलिखित हैं- (i) व्यावसायिक अवसरों की पहचान तथा (ii) नवप्रवर्तन।

प्रश्न 2.
साझेदारी क्या है ?
उत्तर:
जब दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में मिलकर समझौता करके जिस व्यवसाय की स्थापना करते हैं उसे साझेदारी व्यवसाय कहा जाता है। यह व्यक्तियों का एक संघ है। साझेदार आपस में मिलकर ही व्यवसाय का संचालन करते हैं। वे आपस में मिलकर लाभालाभ अनुपात में लाभ-हानियों को बाँटते हैं।

प्रश्न 3.
संयुक्त पूँजी कम्पनी क्या है ?
उत्तर:
संयुक्त पूँजी कम्पनी विधान द्वारा निर्मित एक कृत्रिम व्यक्ति है जिसकी पूँजी अंशों के विभाजित रहती है। अंशधारी कम्पनी के सदस्य होते हैं। लेकिन कम्पनी का अस्तित्व अंशधारियों से अलग रहता है। कम्पनी अपने अंशधारियों के बीच लाभांश के वितरण करती है। कम्पनी का एक सार्वमुद्रा भी होती है।

प्रश्न 4.
परियोजना प्रतिवेदन के विभिन्न तत्व या अंग कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
परियोजना प्रतिवेदन के विभिन्न तत्व या अंग इस प्रकार हैं-

  • प्रवर्तकों का विवरण,
  • उद्यम का विवरण,
  • आर्थिक जीवन योग्यता,
  • तकनीकी सुविधाएँ,
  • वित्तीय सुविधाएँ,
  • लाभदायकता विश्लेषण और
  • संबंधित प्रपत्र इत्यादि।

प्रश्न 5.
कार्यशील पूँजी क्या है ?
उत्तर:
कार्यशील पूँजी एक ऐसी पूँजी है जिससे कच्चा माल को खरीदा जाता है और उत्पादन कार्य में होने वाले खर्चों को पूरा किया जाता है। यह व्यवसाय के कार्यों को करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

प्रश्न 6.
परियोजना प्रतिवेदन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर:
परियोजना प्रतिवेदन उपक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत आवश्यक है। इसके विभिन्न लाभ हैं, जैसे-यह उद्यमों के साथ-साथ वित्तीय संस्थाओं और सरकार के लिए लाभदायक होती है।

प्रश्न 7.
वित्तीय नियोजन क्या है ?
उत्तर:
वित्तीय नियोजन किसी संगठन की पूँजी की आवश्यकता को निर्धारित करता है। यह निश्चित नीतियाँ बनाती हैं जिससे पूँजी का उपयोग और प्रशासन एक निश्चित योजना के द्वारा होता है।

प्रश्न 8.
वित्तीय नियोजन के कौन-कौन उद्देश्य हैं ?
उत्तर:
वित्तीय नियोजन के उद्देश्य इस प्रकार हैं-

  • वित्तीय साधनों का निर्धारण करना,
  • पूँजी के स्रोतों का निर्धारण,
  • वित्तीय नीतियों का निर्धारण,
  • वित्तीय नियंत्रण का निर्धारण,
  • उच्च प्रबंध को प्रतिवेदन करना,
  • लोचपूर्ण,
  • सरलता का तत्त्व।

प्रश्न 9.
अदृश्य सम्पत्ति के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अदृश्य सम्पत्तियों के उदाहरण इस प्रकार हैं-परावर्तन व्यय, कानूनी धर्म, वित्तीय निर्गमन व्यय, ख्याति और पेटेंस इत्यादि।

प्रश्न 10.
स्थायी पूँजी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
स्थायी पूँजी किसी कम्पनी या उपक्रम की स्थायी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। यह वैसी पूँजी होती है जो स्थायी सम्पत्तियों में लगी होती है। यह व्यावसायिक संस्था के लिए लाभ अर्जित करती है।

प्रश्न 11.
सम-सीमान्त बिंदु क्या है ?
उत्तर:
सम-सीमान्त बिंदु एक ऐसा बिंदु होता है जहाँ आय और व्यय बराबर होते हैं। साथ ही लाभ और हानि भी नहीं होगा। बिक्री और उत्पादन की मात्रा सम-सीमान्त बिन्दु से अधिक होने पर लाभ होता है। दूसरी ओर सम-सीमान्त बिन्दु से नीचं बिक्री की मात्रा तथा उत्पादन की मात्रा की स्थिति में सदा हानि होती है।

प्रश्न 12.
एक नया उद्यम स्थापित करते समय किन-किन बातों पर ध्यान दिया जाता है ?
उत्तर:
एक नया उद्यम या उपक्रम को स्थापित करने के लिए विभिन्न बातों पर ध्यान दिया जाता है। इन तत्त्वों को ध्यान में रखकर ही उद्यम को स्थापित किया जा सकता है और संचालन किया जाता है।

उद्यम स्थापित करना- एक उद्यमी को निम्नलिखित अवस्थाओं में से गुजरना पड़ता है-

  • उत्पाद/उद्योग का चयन,
  • पंजीकरण,
  • भूमि/आवास व्यवस्था,
  • वित्तीय सहायता,
  • तकनीकी जानकारी,
  • विपणन सहायता,
  • आयात व निर्यात। इस प्रकार इन सभी अवस्थाओं से गुजर कर एक उद्यमी नया उपक्रम स्थापित करके उसका प्रबंध और संचालन करता है।

प्रश्न 13.
राज्य वित्त निगम क्या है ?
उत्तर:
राज्य वित्त निगम उद्योग-धंधों को वित्त प्रदान करने वाली एक प्रमुख संस्था है। यह भूमि खरीदने, फैक्ट्री के उत्पाद कार्य करने और मशीनों और यंत्रों को खरीदने के लिए ऋण प्रदान करता है। यह निगम नए उद्योगों को स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता देता है। साथ ही विद्यमान उद्योगों का विस्तार और उसका आधुनिकीकरण करने के लिए भी यह ऋण देता है।

प्रश्न 14.
प्रबंध का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
प्रबंध शब्द को कई अर्थों में प्रयोग किया जाता है। कभी-कभी एक संगठन में कार्यरत प्रबंधकीय कर्मियों के समूह का प्रबंध करने के लिए किया जाता है। अन्य समयों में प्रबंध का तात्पर्य नियोजन, संगठन, कार्मिकता, निर्देशन, समन्वयन एवं नियंत्रण प्रक्रिया के रूप में लिया जाता है। इसे ज्ञान के स्वरूप, व्यवहार एवं अनुशासन में जाना जाता है। अनेक लोग हमें इसे नेतृत्व एवं निर्णयन का तकनीक मानते हैं अथवा समन्वयन का साधन तथा कुछ लोग प्रबंध को एक आर्थिक साधन, उत्पादन का एक घटक अथवा अधिग्रहण की व्यवस्था मानते हैं।

प्रश्न 15.
हेनरी फियोल द्वारा दी गयी प्रबंध की परिभाषा को लिखें।
उत्तर:
हेनरी फियोल ने प्रबंध की परिभाषा देते हुए कहा है कि प्रबंध ने एक योजना होती है। संगठन होता है आज्ञा होती है, समन्वय होता है, नियंत्रण होता है, वित्तीय साधनों को एकत्र करना होता है, आगे देखना होता है तथा भविष्य की परीक्षा और कार्य करने के लिए योजना बनायी जाती है।

प्रश्न 16.
उद्यमशीलता क्या है ?
उत्तर:
उद्यमशीलता एक ऐसी व्यवस्थित नवीनता है जो परिवर्तनों के लिए की गयी उद्देश्यपूर्ण एवं संगठित खोज में अंतर्निहित होती है और सुअवसरों के प्रणालीबद्ध विश्लेषण में ऐसे परिवर्तन कम खर्च वाली और सामाजिक नवीनताएँ प्रदान कर सकती हैं।

प्रश्न 17.
संगठन क्या है ?
उत्तर:
संगठन किसी उद्यम के सदस्यों के बीच संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया है। यह संबंध अधिकार और कर्तव्यों के हिसाब से बनाए जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को एक विशेष कार्य सौंपा जाता है। साथ ही उस कार्य को करने का अधिकार भी दिया जाता है।

प्रश्न 18.
संचार से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
संचार शब्द लैटिन भाषा के शब्द Communis से निकला है जिसका अर्थ होता है-सामान्य। अत: Communication अर्थात् संचार का मतलब हुआ कि सामान्य रूप से विचारों में भागीदारी। अर्थात् दो या दो से अधिक लोगों के बीच तथ्यों, विचारों, मतों और भावनाओं को समझने के लिए साझी भूमिका निभाना संचार है।

प्रश्न 19.
उत्पादन का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
माल और सेवाओं का निर्माण करना ही उत्पादन कहलाता है। उत्पादन के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण होता है। जबकि अर्थशास्त्र के अनुसार किसी पदार्थ की उपयोगिता को बढ़ाना, उत्पादन कहलाता है।

प्रश्न 20.
स्कंध नियंत्रण से आप क्या समझते हैं ? .
उत्तर:
स्कंध नियंत्रण उस प्रणाली को कहा जाता है जो उत्पादन के उपयुक्त समय उचित मूल्य पर आवश्यकता के अनुसार तालिकाएँ उपलब्ध कराता है। प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करना है कि स्कंद की मात्रा न तो बहुत कम हो जिससे उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़े और न ही इतनी अधिक हो कि पूँजी ब्लॉक हो जाए।

प्रश्न 21.
ABC विश्लेषण क्या है ?
अथवा, ABC विश्लेषण की परिभाषा बताइए।
उत्तर:
विभिन्न वर्गों में माल का विश्लेषण ही ABC विश्लेषण कहलाता है। मालं पर नियंत्रण की ABC तकनीक को सदा उत्तम नियंत्रण तरीका माना जाता है। A श्रेणी में अधिक उपयोग वाली वस्तुओं को रखा जाता है। जबकि । श्रेणी में मध्यम उपयोग वाली वस्तुओं को रखा जाता है और C श्रेणी में कम उपयोग वाली वस्तुओं को रखा जाता है।

प्रश्न 22.
विपणन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जिस प्रक्रिया से माल उपभोक्ता तक पहुँचता है, उसे विपणन कहा जाता है। यह वैसी प्रणाली है जिससे व्यापार की गतिविधियाँ आपस में चलती हैं और योजना, मूल्य, बिक्री में वृद्धि और माल के वितरण को उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाता है। वास्तव में, विपणन के आधार पर माल की क्रय-विक्रय की सारी क्रियाएँ पूरी की जाती हैं।

प्रश्न 23.
विपणन प्रबंधन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
विपणन प्रबंधन प्रबंध के विशाल क्षेत्र की एक शाखा होती है। इसका संबंध उद्देश्यपूर्ण कार्य से है जिससे विपणन लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इसके अंतर्गत उपभोक्ता संतुष्टि, लाभ में वृद्धि और बिक्री के मूल्य में वृद्धि इत्यादि बातें शामिल रहती हैं।

प्रश्न 24.
थोक व्यापारी से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
थोक व्यापारी एक ऐसा व्यापारी है जो उत्पादकों से माल खरीदकर उन्हें थोक रूप में फुटकर व्यापारियों के हाथ में बेचता है।

प्रश्न 25.
फुटकर व्यापारी क्या है ?
उत्तर:
फुटकर व्यापारी एक ऐसा व्यापारी है जो थोक व्यापारियों से माल खरीदकर अपने दुकान में रखता है और उन्हें ग्राहकों को खुदरा रूप में बेचता है।

प्रश्न 26.
विज्ञापन क्या है ?
उत्तर:
विज्ञापन एक ऐसी विधि है जिसके अनुसार लोगों का ध्यान किसी वस्तु की ओर आकृष्ट करना है। लोग विज्ञापन पढ़ या सुनकर अपनी मनपसंद की वस्तुएँ खरीदने के लिए तैयार हो जाते हैं। अत: विज्ञापन के द्वारा बिक्री में वृद्धि होती है।

प्रश्न 27.
विज्ञापन के दो उद्देश्यों को लिखें।
उत्तर:
विज्ञापन के दो उद्देश्य इस प्रकार हैं-

  • नये उत्पादों की जानकारी-विज्ञापन के माध्यम से लोगों को नये उत्पादों की जानकारी प्राप्त होती है। लोग विज्ञापन देखकर किसी नई वस्तु को खरीदने के लिये तैयार हो जाते हैं।
  • माँग उत्पन्न होना-विज्ञापन के माध्यम से किसी विशेष वस्तु के सम्बन्ध में माँग उत्पन्न की जाती है। वस्तु के गुणों के बारे में जानकारी देकर विज्ञापन उस वस्तु के लिये नया ग्राहक तैयार करते हैं। माँग में वृद्धि होने से बिक्री में वृद्धि होती है।

प्रश्न 28.
विज्ञापन के साधनों के नाम लिखें।
उत्तर:
विज्ञापन के विभिन्न साधन हैं जो ये हैं-

  • समाचार पत्र द्वारा विज्ञापन,
  • पत्रपत्रिकाओं द्वारा विज्ञापन,
  • प्रसारण विज्ञापन,
  • सिनेमा विज्ञापन,
  • विज्ञापन बोर्ड द्वारा विज्ञापन,
  • सिनेमा स्लाइड द्वारा विज्ञापन,
  • मेले प्रदर्शनी द्वारा विज्ञापन,
  • पम्पलेट या हैण्डबिल द्वारा विज्ञापन एवं लाउडस्पीकर द्वारा विज्ञापन इत्यादि।

प्रश्न 29.
संवर्धन क्या है ?
उत्तर:
संवर्धन का अर्थ उत्पादन और सेवा के प्रति ग्राहक की रुचि बढ़ाना है और उत्पादन के विषय में जानकारी देना है।

प्रश्न 30.
विक्रय कला का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
विक्रय कला एक ऐसी कला है जिसके आधार पर विक्रेता वस्तुओं की बिक्री करते हैं। इस कला के माध्यम से विक्रेता ग्राहकों को. वस्तुएँ खरीदने के लिए तैयार कर लेते हैं। इसमें ग्राहकों का दिल और विश्वास जीता जाता है।

प्रश्न 31.
वित्त की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
पूँजी या धन को वित्त कहा जाता है। वित्त को धन का विज्ञान माना जाता है। वित्त को प्रशासनिक क्षेत्र या प्रशासनिक क्रियाओं जिनका संबंध नगद और साख को संगठित करने से है जिससे संगठन के कार्यों को किया जा सके और वांछित उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। वास्तव में वित्त किसी संस्था के लिए रक्त की तरह होती है, क्योंकि इसके माध्यम से ही उपक्रम का कार्य सुचारू रूप से चलाया जाता है।

प्रश्न 32.
पूर्वाधिकार अंश क्या है ?
उत्तर:
पूर्वाधिकार अंश कम्पनी द्वारा पूँजी प्राप्त करने का एक साधन है। इस प्रकार के अंशों . पर कुछ प्राथमिकता होती है जो दूसरे अंशधारियों को नहीं मिलती है, जैसे-कम्पनी के समापन के समय इनका भुगतान समता अंशों से पहले मिलता है तथा निश्चित दर से लाभांश अवश्य दिया जाता है। भले ही कम्पनी को लाभ न हो, लेकिन इस प्रकार के अंशधारियों को मताधिकार नहीं होता है।

प्रश्न 33.
समता अंश से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
यह भी कम्पनी द्वारा पूँजी प्राप्त करने का एक साधन है। समता अंशधारी ही कम्पनी के वास्तविक स्वामी होते हैं जिन्हें मताधिकार भी प्राप्त रहता है। यह कम्पनी के कार्यकलापों पर नियंत्रण रखते हैं। इन्हें लाभांश पूर्वाधिकार अंशों के लाभांश के बाद ही दिया जाता है। प्रत्येक वर्ष की लाभांश पर बदलती रहती है। यानी कभी कम और कभी अधिक भी हो सकती है। कम्पनी का समापन होने पर पूर्वाधिकार अंशधारियों के बाद ही इन्हें पूँजी वापस की जाती है।

प्रश्न 34.
कुल लागत क्या है ?
उत्तर:
किसी भी वस्तु के उत्पादन कार्य में लागत विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनके कुल योग को कुल लागत कहा जाता है। इसमें प्रारंभिक लागत, कारखाना लागत, कार्यालय लागत इत्यादि शामिल रहते हैं।

प्रश्न 35.
कारखाना लागत क्या है ?
उत्तर:
कारखाना लागत का अर्थ उस लागत से है जो मूल लागत में कारखने के खर्च जोड़ने से प्राप्त होती है। इसे Work cost या Factory cost भी कहा जाता है।

प्रश्न 36.
कार्यालय लागत क्या है ?
उत्तर:
कार्यालय के खर्चों को कारखाने की लागत में जोड़कर कार्यालय लागत प्राप्त की जाती है। इसमें बिक्री और वितर। के व्यय शामिल नहीं किए जाते हैं। इसे Office cost या Production cost भी कहा जाता है।

प्रश्न 37.
कोहलर और आर्मस्ट्रांग द्वारा विपणन वातावरण की परिभाषा को लिखें।
उत्तर:
विपणन वातावरण की परिभाषा देते हुए कोहलर और आर्मस्ट्रांग ने यह कहा है कि किसी कंपनी के विपणन वातावरण के उन सब घटकों और शक्तियों से है जिनका विपणन प्रबंध की क्षमता को विकसित करने तथा वांछित उपभोक्ताओं को सफलतापूर्वक विपणन क्रियाओं को करने से होता है।

प्रश्न 38.
सूक्ष्म वातावरण क्या है ?
उत्तर:
सूक्ष्म वातावरण में उन शक्तियों का वर्णन होता है जिनसे कंपनी के ग्राहकों को प्रभावित किया जाता है। यह शक्ति बाध्य होती है। लेकिन कंपनी के बाजार व्यवस्था इसे प्रभावित करती है। इन शक्तियों में माल की पूर्ति देने वाले मध्यस्थ, ग्राहक तथा जनता इत्यादि आते हैं।

प्रश्न 39.
बिक्री मूल्य से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
यदि कुल लागत में एक निश्चित प्रतिशत लाभ जोड़ दिया जाता है, तब उसे बिक्री मूल्य कहते हैं। इस प्रकार बिक्री मूल्य में लाभ सम्मिलित कर लिया जाता है।

प्रश्न 40.
सीमान्त लागत से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
सीमान्त लागत ऐसी लागत होती है जो एक अतिरिक्त इकाई के उत्पादन करने पर कुल लागत को प्रभावित करती है। कुल लागत में वृद्धि या कमी केवल चल लागत के कारण होती है।

प्रश्न 41.
वितरण व्यय (Distribution expenses) क्या है ?
उत्तर:
वितरण व्ययों में वे व्यय आते हैं जहाँ उत्पादन क्रिया पूरी हो जाती है वहाँ से लेकर जब तक उत्पाद उपभोक्ता तक पहुँचता है तब तक के व्यय आते हैं। जैसे-गोदाम के खर्चे, माल ढोने वाली गाड़ी के व्यय, बैंकिंग के व्यय, भेजने के व्यय आदि।

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